Four Vedas in Hindi - वेदों के बारे में पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तों ! इस पोस्ट से माध्यम से हम आपको चारों वेदों (Four Vedas in Hindi) के बारे में सम्पूर्ण जानकरी देंगे. 

इस टॉपिक(अर्थात Ved in hindi or Veda in hindi) से जितने भी प्रश्न परीक्षा में पूछे जा सकते है हमने उन सबका वर्णन यहाँ किया हुआ है.

अगर आपने इसे अच्छे से पढ़ लिया तो परीक्षा में आप से कोई भी प्रश्न नहीं छूटेगा.

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2. भारत में पुर्तगालियों का आगमन 

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Four Vedas in Hindi। चारों वेदों के बारे में पूरी जानकारी

वेद - Vedas in hindi के बारे में जानने से पहले हमें कुछ मूलभूत बातों जान लेना चाहिए जिनके बारे में हमने नीचें बताया है.

वेद का अर्थ

वेद " विद् " धातु से बना है और इसका शाब्दिक अर्थ " ज्ञान (Knowledge) " होता है. 

वेद का दूसरा नाम क्या है?

वेदों का एक अन्य नाम "श्रुति (Shruti or Shruthi)" भी है। 

ऐसा इसलिए है क्योंकि इन्हें संकलित किये जाने से पहले ये गुरु और शिष्य के बीच परम्परा में सुनाये और कण्ठस्थ अर्थात याद (रटवाये) जाते थे। श्रुति का शाब्दिक अर्थ होता है "सुन कर लिखा हुआ साहित्य".

और ऐसा तभी होगा यदि उन्हें अच्छी तरह याद (रटा) गया हो.

वेदों की संख्या कितनी है? Ved kitne prakar ke hote hain?

सर्वप्रथम वेदों की संख्या 3 (तीन) थी.

ये तीन वेद निम्नलिखित थे.

1. ऋग्वेद 

2. सामवेद 

3. यजुर्वेद

इन तीनों वेदों को "वेदत्रयी" (Vedatrayi) कहा गया. बाद में एक अन्य वेद को भी जोड़ा गया. 

वर्तमान में वेदों की संख्या 4(चार) है, जिनमें चौथा वेद "अथर्ववेद" है.


इस प्रकार से अब चार वेद (4 ved name) (4 vedas name in hindi) निम्नलिखित है.

1. ऋग्वेद 

2. सामवेद 

3. यजुर्वेद

4. अथर्ववेद

आईये अब चारों वेदों (Four vedas in hindi) के बारे में विस्तार पूर्वक समझते हैं,


1 . ऋग्वेद (Rigveda in Hindi)

(Four Vedas in Hindi) चारों वेदों में पहला वेद है > ऋग्वेद (Rigveda)

इस ग्रन्थ में अनेक देवताओं के स्तुति में गए जाने वाले मंत्रो का संग्रह है ऐसा माना जाता है कि इसकी रचना सप्तसैंधव प्रदेश में हुई।

संकलनकर्ता : महर्षि कृष्ण द्वैयापन. जिन्हें हम वेदव्यास(Vedvyas) के नाम से जानते है.

वेद का लेखक कौन है? इस प्रश्न का उत्तर भी महर्षि कृष्ण द्वैयापन ही होगा. 

आयुर्वेद , ऋग्वेद(Rigveda) का उपवेद है.

विवरण(Description) : इसमें कुल 10 मण्डल (Divisions) तथा 1028 सूक्त (Hymns) और 10462 मन्त्र ( ऋचा या श्लोक) है.

वंश मण्डल या गोत्र(Clan) मण्डल :- दूसरे (2nd) मण्डल से 7वें (7th) मण्डल तक के मण्डलों को प्राचीन माना गया है। इन्हें ही वंश मण्डल कहा गया है। क्यूंकि इन मण्डलों की रचना किसी गोत्र(Clan) से सम्बद्ध ऋषि(Sage) के परिवार ने की थी.

बाद में 1,8वें,9वें तथा 10वें मण्डल को जोड़ा गया.

ऋग्वेद(Rigveda) के दो ब्राह्मण अर्थात 2 भाग : ऐतरेय ब्राह्मण (Aitareya Brahmana) तथा कौशितिकी ब्राह्मण है.

ऋग्वेद(Rigveda) के तीन पाठ है जो निम्नवत है:-

1) सकाल : इसमें 10 मण्डल तथा 1017 सूक्त

2) बालखिल्य : 11 सूक्त

3) वाष्कल : 56 मंत्र

इनमें सकाल प्रमुख पाठ है. ऋग्वेद में सबसे पवित्र नदी सरस्वती को माना गया है। सरस्वती नदी को "नदीतम" अर्थात नदियों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है.

असतों मा सद्गमय ॥ तमसो मा ज्योतिर्गमय ॥ मृत्योर्मामृतम् गमय ॥

यह श्लोक ऋग्वेद से ही लिया गया है.

"दस्थुहत्या" शब्द का प्रयोग कई बार ऋग्वेद में किया गया है। परन्तु "दासहत्या" का नहीं.

अवेस्ता(Avesta) जो कि ईरानी भाषा का एक प्राचीनतम ग्रन्थ है , ऋग्वेद की बहुत सी बातें अवेस्ता(Avesta) से मिलती-जुलती है. 

दोनों ग्रंथो में देवताओं व सामाजिक वर्गों के नाम सामान है.

पुरुष प्रधानता :

ऋग्वेद(Rigveda) में पुरुष देवताओं की प्रधानता है अर्थात पुरुष देवाओं का उल्लेख अधिक बार हुआ है. 

जिसमें सर्वाधिक बार उल्लेख इंद्र का हुआ है - 250 बार (इंद्र का उल्लेख पुरन्दर के रूप में किया गया है पुरन्दर अर्थात दुर्ग को तोड़ने वाला) | पुर का अर्थ है (नगर या घर) ,अर्थात पुरन्दर का अर्थ, नगर या घर को तोड़ने वाला.

ऋग्वेद(Rigveda) में पुरुष प्रधानता का अनुमान इस से भी लगाया जा सकता है कि ऋग्वेद में पिता का उल्लेख 335 बार किया गया है वहीँ माता का उल्लेख 234 बार.

इंद्र के बाद दूसरे महान पुरुष या देव अग्नि थे अग्नि का उल्लेख 200 किया गया है.

19 जून, 2007 को ऋग्वेद की 30 हस्तलिपियां यूनेस्को के मेमोरी ऑफ वर्ल्ड रजिस्टर (MOW) में शामिल किया गया.

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ऋग्वेद में उल्लेखित महत्वपूर्ण शब्द व उनकी संख्या

ऋग्वेद में कुल 33 देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है.

  1. पिता —  335
  2. जन —  275
  3. इन्द्र —  250
  4. माता —  234
  5. अश्व —  215
  6. अग्नि —  200
  7. गौ (गाय) — 176
  8. विश —  170
  9. सोम देवता —  144
  10. विद्थ —  122
  11. विष्णु —  100
  12. गण —  46
  13. ब्रज गोशाला —  45
  14. कृषि —  33
  15. वरुण —  30
  16. वर्ण — 23
  17. सेना —  20
  18. ब्राह्मण —  15
  19. ग्राम —  13
  20. वृहस्पति —  11
  21. राष्ट्र —  10
  22. क्षत्रिय —  9
  23. समिति — 9
  24. सभा —  8
  25. यमुना —  3
  26. रूद्र —  3
  27. वैश्य —  1
  28. शुद्र —  1
  29. गंगा —  1
  30. राजा –  1
  31. पृथ्वी —  1


2 . सामवेद (Samaveda in Hindi)

(Four Vedas in Hindi) चारों वेदों में दूसरा वेद है > सामवेद(Samaveda)

सामवेद(Samaveda) को भारतीय संगीत का जनक माना जाता है क्योंकि गायन के लिए जरुरी 7 स्वरों की जानकारी हमें सामवेद से ही मिलती है ये सात स्वर 'सा', 'रे,' 'ग', 'म', 'प','ध', 'नि'  हैं. 

सामवेद(Samaveda) में प्रयुक्त शब्द 'साम' का अर्थ है "गान".

सामवेद(Samaveda) के द्रष्टा(Seer) जैमिनी को माना जाता है, जो महर्षि कृष्ण द्वैपायन अर्थात वेदव्यास के शिष्य थे.

सामवेद(Samaveda) की 3 शाखाओं में से सबसे प्रमुख शाखा कौथुम है अन्य दो शाखाएं राणायनीय तथा जैमिनीय हैं. पुराणों में सामवेद की सहस्त्र (अर्थात हजार या अनगिनत) शाखाओं का उल्लेख मिलता है।

सामवेद(Samaveda) के ऋत्विक अर्थात गायनकर्ता 'उद् गाता' ( Udgata ) कहलाता था, उद् गाता का कार्य ऋचाओं का सस्वर गान अर्थात सुन्दर स्वरों (सुरों) में गान करना था.

गन्धर्ववेद(Gandharva Veda) को सामवेद का उपवेद कहा जाता है.

सामवेद(Samaveda) के निम्न ब्राह्मण है :- पंचविश , षडविश, जैमिनीय तथा छान्दोग्य.

सामवेद और अथर्ववेद दोनों का कोई आरण्यक(Aranyakas) नही है. 

सामवेद(Samaveda) में ऋचाओं की कुल संख्या 1549 है परन्तु मात्र 78 ही नई है बाकि 1471 ऋचाएँ , ऋग्वेद से ली गयी है। कुछ किताबों में कुल 1810 मंत्र होने का उल्लेख है जिसमें 75 नए श्लोक तथा बाकि को ऋग्वेद से लिए गए माना जाता है.

3 . यजुर्वेद ( Yajurveda in Hindi ) :


यजुर्वेद(Yajurveda) में प्रयुक्त शब्द "यजुष" या "यजु" का मतलब है यज्ञ.

Yajurveda in Hindi

इसमें यज्ञ करने की विधियों को बताया गया है. यजुर्वेद के उच्चारण कर्ता को "अध्वर्यु या अध्वुर्यु"(Adhvaryu) कहा जाता है.

वैदिक काल में अध्वर्यु या अध्वुर्यु(Adhvaryu) का मुख्य कार्य यजुर्वेद के मौलिक गद्य भाग को पढ़ना और यज्ञ से सम्बंधित कार्यों को करना था. 

धनुर्वेद , यजुर्वेद का उपवेद है.

राजसूय(Rajsuya yagya ) तथा वाजपेय (Vajapeya yagna) नामक यज्ञों का विवरण सबसे पहले यजुर्वेद में ही मिलता है. यजुर्वेद में यज्ञ बलि से सम्बंधित मंत्रो का वर्णन भी किया गया है.

यजुर्वेद दो शैलियों (गद्य शैली , पद्य शैली) में लिखा गया है. यजुर्वेद के 2 प्रमुख भाग कृष्ण यजुर्वेद तथा शुक्ल यजुर्वेद है. 

बहुत से विद्वान शुक्ल यजुर्वेद , को ही वास्तविक यजुर्वेद मानते है शुक्ल यजुर्वेद का एक अन्य नाम वाजसनेयी संहिता(Vajasaneyi Samhita) भी है. 

वाजसेनी (Vajasaneyi) के पुत्र याज्ञवल्कय(Yagyavalkya) के द्वारा द्रष्टव्य किये जाने के कारण शुक्ल यजुर्वेद की संहिताओं को 'वाजसनेय' के नाम से भी जाना जाता है.

4. अथर्ववेद (Atharva veda in Hindi)


(Four Vedas in Hindi) चारों वेदों में चौथा और अंतिम वेद है > अथर्ववेद (Atharva veda)

अथर्ववेद(Atharva veda)  को ब्रह्मवेद(Brahmaveda) अर्थात श्रेष्ठ वेद की संज्ञा दी गयी है. 

इसकी रचना अथर्वा (या अधर्वा) और अंगीरस(Angirasa Rishi) नाम के दो महान ऋषियों ने की थी. 

परन्तु इस वेद का नाम अथर्वा ऋषि के नाम पर पड़ा. इसके दूसरे रचनाकार अंगीरस ऋषि (Angirasa Rishi) के नाम पर इसका नाम "अथर्वगिंङरसवेद" कहा गया.

अथर्ववेद में 20 काण्ड(अध्याय) 731 सूक्त तथा 6000 मन्त्र (कुछ किताबों में 5849 मन्त्र) हैं अथर्ववेद में जादू-टोना , भूत-प्रेत , लौकिक जीवन, वशीकरण , औषधियां, गृह सुख से सम्बंधित मंत्रो को बताया गया है.

अथर्ववेद(Atharva veda) की 2 शाखाएं पिप्लाद एवं शौनक के नाम से जानी जाती है. 

अथर्ववेद में भी लगभग 1200 मन्त्र ऋग्वेद से लिया गया है। अथर्ववेद का उपवेद शिल्पवेद(Shilpaveda) है । सर्वप्रथम काशी का उल्लेख इसी वेद में हुआ है.

अथर्ववेद में सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां माना गया है।अथर्ववेद का एक ब्राह्मण गोपथ है जो पुरोहित अर्थववेद के मंत्रो का उच्चारण करता है , ब्रह्म कहलाता है.

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